आखिरकार खीरी पुलिस ने कर ही दिया बग्गा का खात्मा





लखीमपुर-खीरी। जिले मे कई वर्षों से आतंक का पर्याय बने बग्गा को आखिरकार खीरी पुलिस ने मौत के घाट उतारकर उसका खात्मा कर दिया।

लगातार दो दिनों से मुखबिरों द्वारा मिल रही सूचना पर क्षेत्र की खाक छान रही पुलिस व एसटीएफ की संयुक्त टीम ने बुधवार की सुबह फतेह सिंह उर्फ बग्गा सिंह नामक प्रदेश स्तरीय इनामी बदमाश को ढखेरवा-गिरजापुरी रोड पर दुलही पुरवा साइफन के पास मुठभेड़ में मार गिराया। वहीं बग्गा का एक साथी भागने में कामयाब हो गया।

एसटीएफ व पुलिस की संयुक्त टीम ने निघासन कोतवाली क्षेत्र के गाँव दुलही पुरवा के पास गजियापुर की ओर से आ रहे एक बाइक पर सवार दो लोगों को रोकने का प्रयास किया। पुलिस को देखकर दोनों बाइक सवारों ने भागने का प्रयास करते हुये फायर करना शुरु कर दिया। दोनों ओर से सैंतालीस मिनट तक चली इस मुठभेड़ में टीम ने बग्गा को मार गिराया वहीं दूसरा साथी गन्ने में घुसकर भागने में कामयाब हो गया।

उधर मौके पर मौजूद पुलिस टीम ने आनन-फानन में जख्मी हुए व्यक्ति को लादकर सीएचसी में भर्ती कराया जहाँ मौजूद चिकित्सक डॉ अरुण कुमार मिश्रा ने उसे मृत घोषित कर दिया। घटना के बाद सीएचसी पहुँचे पुलिस अधीक्षक डा0 एस चनप्पा व एएसपी एसटीएफ वीर विक्रम सिह ने बग्गा के खात्मे की पुष्टि की। बता दें कि बग्गा के ऊपर राज्य सरकार ने एक लाख का इनाम घोषित कर रखा था।

कोर्ट जाते समय फरार हुआ था बग्गा
ज्ञात हो बीते 10 सितम्बर 2013 को खीरी जिले के पुलिस अधीक्षक आवास से चंद कदम की दूरी पर स्थित दीवानी न्यायालय के गेट से सिपाही की हत्या कर फरार हुए बग्गा का आखिरकार एनकाउंटर करने में पुलिस कामयाब रही। फरार होने में मदद देने वाले साथी सचिन गुप्ता उर्फ डालू को दो साल पहले पुलिस ने एक एनकाउंटर में ढेर कर दिया था।

गौरतलब रहे कि बग्गा सिंह पर हत्या, लूट, बलात्कार जैसे कई मामलों के मुकदमे दर्ज थे और वह पाँच सालों से जेल से फरार चल रहा था। कई मामलों में वह जेल में बंद हुआ। जेल में ही उसने अपने साथी सचिन गुप्ता उर्फ डालू के साथ मिलकर फरार होने की योजना बनाई। डालू किडनी का रोगी था। अगस्त 2013 में डायलोसिस कराकर लौटते समय डालू कोतवाली के पास से पेशाब करने के बहाने पुलिस के चंगुल से फरार होने में कामयाब रहा।

इस मामले में दोषी पुलिस कर्मियों पर कार्रवाई तो हुई पर पुलिस अभी भी इस बात से अंजान थी कि आखिर सचिन गुप्ता का असली मकसद क्या था। करीब एक महीने पर 10 सितम्बर 2013 को पुलिस बग्गा सिंह व उसके एक साथी को पेशी पर न्यायालय ले जा रही थी। दीवानी न्यायालय का गेट जैसे ही पार किया तभी कुछ लोग आए और उन्होंने बग्गा को ले जाने का प्रयास किया।

इस दौरान अभिरक्षा में आए सिपाही ने जब मुकाबला शुरू किया तो हमलावरों ने उसे गोली मार दी। आखिरी सांस तक सिपाही लड़ता रहा लेकिन उसकी मदद में आने की बजाए लोगों ने भगदड़ मचा दी। नतीजन हमलावर अपने साथी को छुड़ाकर ले जाने में कामयाब रहे। इसके बाद से पुलिस बग्गा और उसके साथी डालू की तलाश में थी। बग्गा न केवल शातिर किस्म का था बल्कि उसका आपराधिक नेटवर्क नेपाल में भी फैला था।

नेपाल मे बनाया ठिकाना
बग्गा ने पकड़े जाने के डर से नेपाल के वर्दिया जिले के थाना बलुवा डोडरा में ही अपनी साथी शुकलाल की बेटी की ननद नंदनी के यहां डेरा बनाया। इसका भी खुलासा तब हुआ जब शुकलाल को पुलिस ने दबोच लिया। लेकिन मामला खीरी से निकल कर इंटरपोल तक पहुंचने के चलते पुलिस का उस तक पहुंच सकना नामुमकिन सा हो रहा था। फिर भी जिले में सक्रिय खुफिया एजेंसी और मुखबिर दोनों की हर हरकत पर नजर गड़ाए रहे।

23 जनवरी 2015 को बग्गा और डालू के निघासन थाना क्षेत्र की ग्राम पंचायत लुधौरी के मजरा गोविंदपुर में होने की सूचना मुखबिरों द्वारा मिली। सूचना मिलते ही तत्कालीन एसपी अरविंद सेन स्वयं उन्हें गिरफ्तार करने पहुंचे। कई थानों की पुलिस दोनों को दबोचने में लगाई गई लेकिन पुलिस के होने की खबर लगते ही दोनों अपराधी हमलावर हो गए। उन्होंने पुलिस टीम पर फायरिंग शुरू कर दी। कई घंटे चली मुठभेड़ के बाद सचिन गुप्ता उर्फ डालू का एनकाउंटर हो गया। वहीं बग्गा सिंह चकमा देखकर भाग निकलने में कामयाब रहा।

बग्गा वापस नेपाल पहुंच चुका था और पहले से कहीं अधिक चैकन्ना हो गया था। नेपाल पहुंचने के बाद उसने इंटरपोल से बचने के लिए अपना हुलिया तक बदल लिया था। दाढ़ी और पगड़ी हटाकर क्लीनसेव रहने लगा था। इस दौरान कई बड़े अपराधों को भी उसके इशारे पर गुर्गों ने अंजाम दिया। लेकिन 2015 के एनकाउंटर से पुलिस को यह विश्वास था कि बग्गा अपनी फितरत के चलते लौटकर खीरी की सरजमीं पर कदम जरूर रखेगा और वही हुआ।

पुलिस ने दी सरेंडर करने की हिदायत
बुधवार को जरिए मुखबिर सूचना मिली कि बग्गा निघासन थाना क्षेत्र के पढ़ुआ इलाके में मौजूद है। पता चलते ही एसटीएफ व कई थानों की पुलिस तथा अधिकारी मौके पर पहुंच गए। सभी ने बग्गा को घेर लिया और उससे सरेंडर करने को कहा लेकिन आत्मसमर्पण की बजाए बग्गा ने फिर से 2015 वाली गलती ही दोहराई। पुलिस ने भागने की कोशिश में फायरिंग शुरू कर दी। काफी देर तक चली मुठभेड़ के बाद बग्गा भी पुलिस की गोलियों का शिकार हो गया। पुलिस ने उसके शव को कब्जे में ले लिया।

जरायम की दास्तां
शातिर बग्गा सिंह ने जरायम की दुनियां में कदम रखा वो भी हत्या करने के बाद। कई साल पहले उसने लूट के दौरान एक दूधिए को मार डाला था लेकिन उसे पकडना सिर्फ इसलिए ही मुश्किल नहीं था क्योंकि पुलिस के पास उसका ठिकाना नहीं था बल्कि इसलिए मुश्किल था क्योंकि उसका एक जुड़वा भाई भी था। जुड़वा भाई का नाम था काले सिंह। काले सिंह भी शातिर अपराधी था।

उसने भी कई बड़ी वारदातों का अंजाम दे रखा था। कई बार तो बग्गा सिंह जुड़वा भाई का सहारा लेकर खुद को काले सिंह बताकर घूमता रहा लेकिन यह चालबाजी ज्यादा दिन तक नहीं चली। आखिरकार एक दिन दोनों ही भाइयों के जरायम का खुलासा हुआ और सात साल पहले काले खैरीगढ स्थित सरजू पुल के पास पुलिस व पब्लिक एनकाउंटर में अपनी जान गवां बैठा था।

भागने के बाद फिर दिया बड़े अपराधों को अंजाम
10 सितम्बर 2013 को सिपाही की हत्या कर साथी डालू के साथ फरार हुए बग्गा सिंह ने अपने नेटवर्क के जरिए कई बड़े अपराधों को अंजाम दिया। पहला मामला तब सामने आया जब बग्गा के गुर्गों ने धौरहरा के एक ज्वैलर्स को गहने दिखाने के बहाने तहसील के पास बुलाया और वहीं से उसका अपहरण कर ले गए। इसके बाद घर पर फोन हुआ और करीब 10 लाख की फिरौती मांगी गई।

पुलिस सर्राफे को तलाशती रही, कुछ दिन बाद अचानक निघासन थाना क्षेत्र उसके पड़े होने की खबर लगी। परिवारीजनों ने बताया कि उसे अपहरणकर्ताओं ने छोड़ दिया लेकिन खास सूत्रों ने बताया कि उसे छोड़ा नहीं बल्कि फिरौती की रकम देकर छुड़ाया गया था। पड़ोसी मित्र देश नेपाल के जरिए बग्गा ने खीरी जिले के अलावा पड़ोसी जिलों के व्यापारियों और डाक्टरों को निशाना बनाया तथा जान-माल की धमकी देकर रंगदारी मांगी।

व्यापारियो की जुबांनी
कस्बा के व्यापारी अशोक चैबिया कहते है कि बग्गा सिंह का आतंक पूरे जिले में बना हुआ था। इसके द्वारा आये दिन बडे व्यापारियों को परेशान किया जाता रहा है। यही के व्यापारी रामकिशोर मौर्य ने बताया की बग्गा गैंग का भय क्षेत्र के हर वर्ग के लोगो मे बन गया था जिससे वह यह नाम सुनते ही सहम जाते थे। यही बताते हुए पूर्व प्रधान जगदीश गुप्ता बताते है कि बग्गा गैंग के नाम से तराई में अन्य गैंग भी बड़ी घटनाओं को अंजाम दे दिया करते थे।

दो दशको तक बना रहा आतंक का साम्राज्य
भाई करमजीत सिंह की हत्या के बाद अपराध जगत में आए सिंगाही थाना क्षेत्र के मांझा गांव के काला-बग्गा दोनों भाई कई जिलों में दो दशकों तक आतंक का साम्राज्य बने रहे जिसमें हत्या, डकैती, लूट, अपहरण सहित अन्य संगीन धाराओं में सिंगाही, निघासन, तिकोनिया, धौरहरा, लखीमपुर, पूरनपुर-पीलीभीत में लगभग दो दर्जन मुकद्दमें पंजीकृत हुए। भाई परमिंदर सिंह की हत्या का बदला लेने उतरे दोंनो भाई काला-बग्गा ने 12 साल की उम्र से ही अपराध की दुनिया मे कदम रखा और एक के बाद एक कई जिलों में 23 मुकदमे हत्या, लूट, डकैती, अपहरण के साथ-साथ अन्य संगीन धाराओं में मुकदमे दर्ज हुए।

पुलिस अधीक्षक डॉ0 एस चिनप्पा ने संभाली कमान
प्रदेश में योगी सरकार बनने के बाद खीरी जिले के इनामी बदमाशों के सफाए की जिम्मेदारी वर्तमान पुलिस अधीक्षक डॉ0 एस चिनप्पा ने संभाली और उन्होंने एक लाख के इनामी बदमाश बग्गा को आज निघांसन थाना क्षेत्र के नेपाली सीमा के करीब एसटीएफ के सहयोग से मार गिराया जिससे आज दो दसकों से आतंक का पर्याय बने बग्घा का खात्मा हो गया।

शांत हो गई बग्गा की डरावनी आवाज
हैलो मैं बग्गा बोल रहा हूं, तीन दिनों के अंदर अगर मेरे बताए पते यह रकम नही पहुँची तो......! यह डरावनी आवाज बुधवार को सुबह आखिर कार शांत हो गई। इसके शांत होते ही तराई के व्यपारियो में खुशी का माहौल बन गया और बड़ी संख्या में उसके शव को देखने के लिए क्षेत्र लोग अस्पताल में एकत्र हो गए। बड़ी संख्या में पुलिस फोर्स व क्षेत्रवासियों के अस्पताल पहुचने से अस्पताल परिसर पूरे दिन छावनी बना रहा।

नया सवेरा नई खबर के लिए विनोद गुप्ता / शकील अहमद की विशेष रिपोर्ट

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